एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर के बारे में जानकारी

आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा हमारे लिए सबसे बढ़कर है, इसलिए हमने आपके लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर तैयार किया है. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से आपके मैसेजेस, फ़ोटो, वीडियो, वॉइस मैसेजेस, डॉक्यूमेंट्स, स्टेटस और कॉल्स सुरक्षित रहते हैं और कोई भी इनका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता.
पर्सनल मैसेजिंग
WhatsApp Messenger से की जाने वाली चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होती हैं. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की मदद से आपके मैसेजेस और कॉल्स, सिर्फ़ आपके और उन लोगों के बीच रहते हैं जिनसे आप चैट करते हैं. कोई भी दूसरा व्यक्ति उन्हें पढ़ या सुन नहीं सकता, WhatsApp भी नहीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन ऑन होने से आपके मैसेजेस पर डिजिटल लॉक लग जाता है और उस लॉक को खोलने की डिजिटल चाबी सिर्फ़ आपके और उन्हीं के पास होती है जिन्हें मैसेज मिला है. यह सब ऑटोमैटिकली होता है. अपने मैसेज सुरक्षित रखने के लिए आपको कोई स्पेशल सेटिंग ऑन करने की ज़रूरत नहीं होती.
बिज़नेस मैसेजिंग
हर WhatsApp मैसेज उसी सिग्नल एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल से सुरक्षित होता है, जिसका इस्तेमाल आपके डिवाइस से मैसेज भेजे जाने से पहले, उसे सुरक्षित करने के लिए किया जाता है. बिज़नेस अकाउंट को भेजे जाने वाले मैसेजेस, बिज़नेस की चुनी गई जगह पर ही सुरक्षित रूप से डिलीवर होते हैं.
अगर बिज़नेस, WhatsApp Business ऐप का इस्तेमाल करते हैं या कस्टमर्स के मैसेजेस को खुद मैनेज और स्टोर करते हैं, तो WhatsApp उन बिज़नेसेज़ के साथ की गई चैट्स को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मानता है. बिज़नेस को मैसेज मिलने के बाद, उस बिज़नेस की ही प्राइवेसी पॉलिसी लागू होती है. बिज़नेस चाहे तो कस्टमर्स के मैसेजेस देखने और उनके जवाब देने के लिए लोगों को काम पर रख सकता है या किसी कंपनी/वेंडर को काम सौंप सकता है.
कुछ बिज़नेसेज़ मैसेजेस को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने और उनका जवाब देने के लिए1 WhatsApp की पेरेंट कंपनी, Meta का इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको दिखने वाले विज्ञापन के लिए Meta ऑटोमैटिकली आपके मैसेज के कंटेंट का इस्तेमाल नहीं करता. बिज़नेस अपनी मार्केटिंग के लिए इन चैट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें Meta पर विज्ञापन देना भी शामिल है. अगर आप किसी बिज़नेस की प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप उनसे कभी भी संपर्क कर सकते हैं.
ध्यान दें: WhatsApp पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैट का एन्क्रिप्शन स्टेटस यूज़र को बताए बिना नहीं बदल सकता. अगर कोई बदलाव किया जाता है, तो यूज़र को इसका नोटिफ़िकेशन मिलता है. कौन सी चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं, इस बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारा व्हाइट पेपर पढ़ें.
पेमेंट
कुछ देशों में WhatsApp पर पेमेंट फ़ीचर उपलब्ध है. इस फ़ीचर का इस्तेमाल करके एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसे ट्रांसफ़र किए जा सकते हैं. कार्ड और बैंक नंबर, एन्क्रिप्ट करके बहुत ही सुरक्षित नेटवर्क पर स्टोर किए जाते हैं. बैंक को ट्रांज़ेक्शन प्रोसेस करने के लिए पेमेंट से जुड़ी जानकारी की ज़रूरत होती है, इसलिए ये पेमेंट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होतीं.
‘कॉन्टैक्ट की डीटेल्स’ स्क्रीन पर मौजूद "सुरक्षा कोड वेरिफ़ाई करें" स्क्रीन क्या है?
आपके और किसी दूसरे यूज़र के बीच होने वाली एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैट का अपना सुरक्षा कोड होता है. इसका इस्तेमाल यह वेरिफ़ाई करने के लिए किया जाता है कि आपके द्वारा उस चैट में भेजे गए मैसेजेस और की गई कॉल्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं या नहीं.
ध्यान दें: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैट्स के लिए वेरिफ़िकेशन प्रोसेस ज़रूरी नहीं होता. इसका इस्तेमाल सिर्फ़ यह कन्फ़र्म करने के लिए किया जाता है कि आपके मैसेज और कॉल्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं या नहीं.
यह कोड ‘कॉन्टैक्ट डीटेल्स स्क्रीन’ पर QR कोड और 60 अंकों वाले नंबर के रूप में देखा जा सकता है. ये कोड हर चैट के लिए अलग होते हैं. हर चैट के अलग-अलग लोगों के कोड मिलाकर यह देखा जा सकता है कि चैट पर भेजे गए मैसेजेस एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं या नहीं. सुरक्षा कोड दरअसल डिजिटल लॉक की वह चाबी है, जिसे सिर्फ़ आपके और मैसेज पाने वाले के बीच ही शेयर किया जाता है. बेफ़िक्र रहें, यह असली चाबी नहीं है, इसे हमेशा सीक्रेट रखा जाता है. जब आप यह वेरिफ़ाई करते हैं कि चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, तो इससे यह भी वेरिफ़ाई हो जाता है कि आप और आपके कॉन्टैक्ट के लिंक किए गए डिवाइसेज़ की लिस्ट भी अप टू डेट है.
चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है या नहीं, यह वेरिफ़ाई करने के लिए:
  1. चैट खोलें.
  2. ‘कॉन्टैक्ट की डीटेल्स’ स्क्रीन खोलने के लिए कॉन्टैक्ट के नाम पर टैप करें.
  3. QR कोड और 60 अंकों वाला नंबर देखने के लिए एन्क्रिप्शन पर टैप करें.
    • ध्यान दें: इस फ़ीचर का इस्तेमाल सिर्फ़ वे कॉन्टैक्ट कर सकते हैं, जिनकी चैट एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड है.
अगर आप और आपका कॉन्टैक्ट एक-दूसरे के पास मौजूद हैं, तो आप में से कोई भी एक-दूसरे का QR कोड स्कैन कर सकता है या 60 अंकों वाला नंबर खुद मिलाकर देख सकता है. अगर आप QR कोड स्कैन करते हैं और वह कोड मैच हो रहा है, तो आपको स्क्रीन पर हरा चेकमार्क दिखेगा. हरा चेकमार्क दिखने का मतलब है कि कोई भी आपके मैसेजेस या कॉल्स को पढ़ या सुन नहीं सकता.
अगर आप और आपका कॉन्टैक्ट एक-दूसरे के पास मौजूद नहीं हैं, तो आप उन्हें किसी दूसरे प्लेटफ़ॉर्म की मदद से 60 अंकों वाला नंबर भेज सकते हैं. अपने कॉन्टैक्ट को बताएँ कि कोड मिलने के बाद वे उसे कहीं लिख लें और फिर उसे ‘कॉन्टैक्ट की डीटेल्स’ स्क्रीन पर ‘एन्क्रिप्शन’ में दिखाई देने वाले 60 अंकों के नंबर से मिलाएँ. Android और iPhone के यूज़र्स ‘सुरक्षा कोड वेरिफ़ाई करें’ स्क्रीन पर मौजूद ‘शेयर करें’ बटन का इस्तेमाल करके SMS, ईमेल आदि से 60 अंकों वाला नंबर भेज सकते हैं.
अगर कोड मैच नहीं होते, तो हो सकता है कि आप किसी दूसरे कॉन्टैक्ट या फ़ोन नंबर का कोड स्कैन कर रहे हों. अगर आपके कॉन्टैक्ट ने हाल ही में WhatsApp को फिर से इंस्टॉल किया है, अपना फ़ोन बदला है या किसी डिवाइस को पेयर किया या हटाया है, तो हमारी सलाह है कि उन्हें नया मैसेज भेजकर कोड रीफ़्रेश करें और फिर कोड को स्कैन करें. सुरक्षा कोड बदलने के बारे में ज़्यादा जानने के लिए यह लेख पढ़ें.
ध्यान दें, अगर आप और आपका कॉन्टैक्ट एक से ज़्यादा डिवाइसेज़ पर WhatsApp इस्तेमाल करते हैं, तो आपको अपने और उस कॉन्टैक्ट के सभी डिवाइसेज़ पर सुरक्षा कोड वेरिफ़ाई करना होगा.
WhatsApp पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर क्यों दिया गया है और इससे यूज़र्स सुरक्षित कैसे रह सकते हैं?
WhatsApp आपकी सुरक्षा को सबसे ज़रूरी मानता है. हमने ऐसे कई मामले सुने और देखे हैं जिनमें हैकर्स गैरकानूनी तरीके से निजी डेटा चुराते हैं और टेक्नॉलजी का गलत इस्तेमाल करके चुराई गई जानकारी से लोगों को नुकसान पहुँचाते हैं. साल 2016 में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर लागू होने के बाद से, डिजिटल सुरक्षा पर और भी ज़्यादा ध्यान दिया जाने लगा है.
WhatsApp, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित मैसेजेस और कॉल्स को न तो देख सकता है और न ही सुन सकता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि WhatsApp पर भेजे गए और मिलने वाले मैसेजेस का एन्क्रिप्शन और डीक्रिप्शन सिर्फ़ आपके डिवाइस पर ही होता है. जैसे ही आप डिवाइस से मैसेज भेजते हैं, तो पहले उसे क्रिप्टोग्राफ़िक लॉक से सुरक्षित किया जाता है जिसका की-कॉम्बिनेशन सिर्फ़ मैसेज पाने वाले के पास होता है. इसके अलावा, हर मैसेज के साथ यह की-कॉम्बिनेशन बदलता रहता है. यह सब बैकग्राउंड में होता है, लेकिन आप अपने डिवाइस पर सुरक्षा वेरिफ़िकेशन कोड देखकर कन्फ़र्म कर सकते हैं कि आपकी बातचीत सुरक्षित है या नहीं. यह कैसे काम करता है, इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारा व्हाइट पेपर पढ़ें.
लोग यह जानना चाहते हैं कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फ़ीचर से कानूनी एजेंसियों के काम पर क्या असर पड़ता है. पूरी दुनिया में कानूनी एजेंसियाँ लोगों को सुरक्षित रखने के लिए जो काम कर रही हैं, WhatsApp उसकी सराहना करता है. हम लागू होने वाले कानून और नीति के हिसाब से कानूनी एजेंसियों के अनुरोध चेक करके उनका जवाब देते हैं. हम ज़्यादा ज़रूरी अनुरोधों का जवाब पहले देते हैं. हमने कानूनी एजेंसियों की जानकारी के लिए एक लेख तैयार किया है, जिसमें हमारे द्वारा एकत्रित की जाने वाली सीमित जानकारी के बारे में बताया गया है. साथ ही, इस लेख में यह भी बताया गया है कि कानूनी एजेंसियाँ WhatsApp से यह जानकारी पाने का अनुरोध कैसे कर सकती हैं. आप यह लेख यहाँ जाकर पढ़ सकते हैं.
WhatsApp पर अपनी सुरक्षा के बारे में ज़्यादा जानने के लिए WhatsApp सुरक्षा पर जाएँ.
12021 में.
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