कॉन्टैक्ट्स और WhatsApp Business ऐप के बारे में जानकारी

GDPR और आपके डिवाइस की एड्रेस बुक में सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स
WhatsApp Business ऐप इस्तेमाल करते समय आप अपने डिवाइस की एड्रेस बुक में सेव किए गए सभी कॉन्टैक्ट्स के कंट्रोलर होते हैं. कंट्रोलर के तौर पर, अपने कॉन्टैक्ट्स को प्रोसेस करने के लिए आपके पास कानूनी आधार होना ज़रूरी है. इसके तहत, आपके पास कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी ज़रूरत, कानूनी हित, सहमति या GDPR के आर्टिकल 6 में बताया गया कोई दूसरा कानूनी आधार होना चाहिए.
जब आप WhatsApp को इन कॉन्टैक्ट्स का ऐक्सेस देते हैं, तो WhatsApp आपका डेटा प्रोसेसर बन जाता है. इसके बाद हम यह चेक करते हैं कि आप इन कॉन्टैक्ट्स को मैसेज भेज सकते हैं या नहीं. साथ ही, हम यह भी वेरिफ़ाई करते हैं कि इन कॉन्टैक्ट्स को मैसेज डिलीवर हो सकें. ज़्यादा जानकारी के लिए, WhatsApp Business डेटा को प्रोसेस करने से जुड़ी शर्तें देखें. इसे हमारी WhatsApp Business से जुड़ी सेवा की शर्तों में शामिल किया गया है.
अपने डिवाइस की एड्रेस बुक का ऐक्सेस मैनेज और कंट्रोल ऐसे करें
आप WhatsApp को जिन कॉन्टैक्ट्स का ऐक्सेस देते हैं, उन्हें कंट्रोल करने के कई तरीके हैं. जैसे कि आप सिर्फ़ उन कॉन्टैक्ट्स को ही शामिल सकते हैं जिनके लिए आपके पास अपने डिवाइस की एड्रेस बुक में शामिल करने का कानूनी अधिकार है. ऐसा करने का एक फ़ायदा यह है कि इससे आपको और आपके कर्मचारियों को डेटा की प्राइवेसी बनाए रखने में मदद मिलती है. बिज़नेस से जुड़े कॉन्टैक्ट्स और डिवाइसेज़ को निजी कॉन्टैक्ट्स और डिवाइसेज़ से अलग रखने पर, आपको कस्टमर्स के डेटा या कंपनी के डिवाइसेज़ का गलत इस्तेमाल होने से रोकने में मदद मिलती है. इसी तरह, निजी कॉन्टैक्ट्स और डिवाइसेज़ को बिज़नेस से जुड़े कॉन्टैक्ट्स और डिवाइसेज़ से अलग रखने पर, आपकी निजी जानकारी या निजी डिवाइस का गलत इस्तेमाल होने से रोकने में मदद मिलती है.
अगर आप एक ही डिवाइस पर बिज़नेस से जुड़े और निजी कॉन्टैक्ट्स के नंबर सेव करना चाहते हैं, तो आप ऐसे टूल्स की मदद से अपनी एड्रेस बुक को अलग-अलग भागों में बाँट सकते हैं, जिससे दोनों तरह के कॉन्टैक्ट्स को अलग-अलग एड्रेस बुक में रखा जा सके.
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